बटोही गीत: बाबु रघुवीर नारायण · Dec 1, 11:06 PM
सुन्दर सुभूमि मैया भारत के देसवा से
मोरे प्रान बसे हिन्द देस रे बटोहिया।
एक द्वार घेरे राम हिम-कोतवलवा से
तीन द्वार सिंधु घेहरावे रे बटोहिया॥
जाहु-जाहु भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ
जहँवा कुहुँकि कोइली बोले रे बटोहिया।
पवन सुगन्ध मन्द अमर गगनवा से
कामिनी बिरह राग गावे रे बटोहिया।
बिपिन अगम घन सघन बगन बीच
चम्पक कुसुम रंग देवे रे बटोहिया।
द्रुम बट पीपल कदम्ब निम्ब आम वृक्ष
केतकी गुलाब फूल फूले रे बटोहिया।
तोता तूती बोले रामा बोले मेंगरजवा से
पपिहा के पी-पी जिया लागे रे बटोहिया।
सुन्दर सुभूमि मैया भारत के देसवा से
मोरे प्रान बसे गंगा धार रे बटोहिया।
पूरा गीत सुनीं : राकेश उपाध्याय के स्वर में
— Sri